420-चकबस्त
अपने सिर आई,
दूसरों के सिर डालने के,
एक दूसरे की टांग खींचने,
मीन-मेख निकालने के,
आज-कल, आज-कल कह कर,
बात टालने के,
साँपों को दूध पिलाकर,
आस्तीनों मे नाग पालने के,
और उन्हें जुल्फें समझ कर,
हरदम हाथों से सम्हालने के,
हम अभ्यस्त हो गए हैं|
सरकार के हर काम की,
खिल्ली उड़ाने में,
सरकारी पार्टियों में फोकट की ,
मदिरा चढाने में,
सरकार द्वारा आबंटित
धन पर दाँत गढ़ाने में,
पकड़े जाने पर सबको,
उल्टी पट्टी पढ़ाने में,
वोट पाने के लिए,
क़ौमों को लड़ाने में,
हम व्यस्त हो गए हैं|
जब तब की,
किन्तु, परंतु, ताकि से,
सत्ता बचाए रखने के,
गुणा, जोड़ बाकी से,
हर हफ्ते लाल सावधानी,
जारी होने की झांकी से,
हिंदुस्तान के खिलाफ बढ़ती,
चीन की चालाकी से,
निराशा जगाने वाले,
राष्ट्रीय खेल हाकी से,
हम ध्वस्त हो गए हैं|
नित नए उजागर होते,
घोटालों की मार से,
विपक्ष और सरकार की,
रोज होने वाली तकरार से,
जंतर मंतर से हर चौथे महीने,
अन्ना की हुंकार से,
डालर के मुक़ाबले रुपया
गिरने के आसार से,
आतंकवादियों को भारत को,
सौंपने के पाकिस्तान के इंकार से,
हम पस्त हो गए हैं|
इठला कर किए गए,
माशूका के निहोरों से,
समय समय पर प्राप्त तोहफे,
अपने पराये औरों से,
पुलिस द्वारा ढूंढ निकाले गए,
आतंकवादियों के ठौरों से,
बार बार होने वाले,
नेताओं के दौरों से,
अपने किए गए नए पुराने,
वायदों को निभाने के ज़ोरों से,
हम आश्वस्त हो गए हैं|
असलियत छुपाने के लिए,
ओढ़े गए लवादों से,
चुनाव जीतने के लिए
किए गए लुभावने वायदों से,
भविष्य में होने वाले बताए गए,
संभावित फ़ायदों से,
आय कर में लागू होने वाले,
तरह तरह के कायदों से,
रोज रोज होने वालीं,
मनमोहक कवायदों से,
हम विश्वस्त हो गए|
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