Monday, 12 November 2012


582-व्यंग
तौबा तौबा,
आजकल की पीढ़ी के,
निराले ढंग हो गए हैं|
कपड़े भी इतने तंग हो गए हैं,
कि वस्त्र कम,
ज्यादा व्यंग हो गए हैं|
 580-प्रणय-दृश्य
रुपहले पर्दे पर प्रणय दृश्य,
जब से नायक नायिका ,
खुल्लमखुल्ला खुद करने लगे हैं|
तब से सारे पेड़-पौधे, पक्षी
बेरोजगार फिरने लगे हैं|

 577-जगहँसाई
हिन्दू हो, मुसलमाँ हो,
सिख या कि ईसाई हो|
अमूमन हिदोस्तानी पत्नियाँ ,
नहीं करतीं उजागर अपने पति की,
किसी भी बुराई को|
पति शराबी हो, जुआरी हो,
यहाँ तक कि हरजाई हो|
और तो और उनकी,
पिटाई करने में कसाई हो|
फिर भी वे नहीं चाहतीं,
कि पतियों की जगहँसाई हो|
581-सुहाग चिन्ह
मेरे वो,
अब पहले जैसे नहीं रहे,
कुछ भिन्न हो गए हैं|
छेड़ो तो गुर्राते हैं,
जैसे खिन्न हो गए हैं|
जबसे मोहल्ले,
में वो परकटी आई है,
उसके पीछे जिन्न हो गए हैं|
लोगबाग तो यहाँ तक कहते हैं,
कि वो उस परकटी के,
अभिन्न हो गए हैं|
मुझे तो लागने लगा है,
कि वो अब पति रहे ही नहीं,
मेरे सुहाग चिन्ह हो गए हैं|

Friday, 12 October 2012

उंगलीनामा


१२-उंगली भर
वे ही,
मानव शरीर के,
इतने महत्वपूर्ण अंग को,
‘उंगली’ ‘भर’ कहते हैं|
जो सारा जीवन,
इसी उंगली के इशारों पर,
नाच किया करते हैं|
अब आप ही कहिये,
क्या होता,
जो उँगलियाँ न होतीं?
गिनने में,
असुविधा तो होती ही होती,
उंगली पकड़ कर,
चलने वालों को भी दुविधा होती|
ऐसे लोग बुरी तरह,
छटपटाते|
जिन्हें आदत है बेबजह करने की,
पर कर न पाते|
न वे टेढी कर पातीं,
न ही सीधी से,
घी ही निकाल पातीं|
फिर कैसे कुम्हड़े की बतियाँ,
तर्जनी देख मुर्झातीं?
जिनके बिना पंजे की कल्पना ही,
थी बेमानी|
फिर कांग्रेस कैसे कर पाती,
मनमानी?
नाखून भी कैसे उगते,
जो न होता पंजा?
किसी को कोई डर ही न होता,
चाहे बालों वाला होता,
या होता गंजा |
अंगूठा बेचारा,
जिंदगी भर रहता क्वांरा|
मंगनी का छल्ला,
फिरता मारा मारा|
फिन्गर प्रिंट के अभाव में,
चोर कैसे पकड़ते?
धुंए के छल्ले कैसे उड़ाते,
सिगरेट कहाँ जकड़ते?
बगीचे के एकांत कोने में,
प्रेमी-प्रेमिका आपस में,
क्या फंसाते?
बच्चों के पेट में,
गुदगुदी कर कर के,
उन्हें कैसे हंसाते?
धार्मिक कृत्यों में,
हवन कैसे करते?
सरकारी पैसे का,
बिना दस्तखत,
गबन कैसे करते?
बीबी के पकाए बेस्वाद खाने की,
झूठी तारीफ़ कैसे कर पाते,
बिना उंगलियां चाट कर खाए?
कैसे अपनी मासूमियत,
सिद्ध करते,
बिना उंगलियां चटखाए?
तबला, सारंगी, सितार, हारमोनियम,
भी तो न हम बजा पाते|
और यदि ऐसा होता तो,
हम सब कर्णप्रिय संगीत से,
महरूम रह जाते|
कवियों की कल्पना,
कोरी कल्पना ही रह जाती|
उसको मूर्त कैसे करते,
जब लंबी पतली उँगलियों के बिना,
रूपसियों की,
खूबसूरती ही ढह जाती|
शाहजहां कैसे हुकुम सुनाता,
उंगलियां काट ली जाएँ,
ताजमहल बनाने वालों की|
और हम कैसे जान पाते,
स्वार्थपरता और निष्ठुरता,
राजमहल में रहने वालों की?
पोरों का क्या होता,
बेचारे अनाथ हो जाते|
आज की इस मंहगाई में,
कहाँ,
अपना ठिकाना बनाते?

Thursday, 4 October 2012


515-युक्ति से नियुक्ति
आपको मतलब होना चाहिए,
सिर्फ आम खाने से|
न कि,
गुठलियाँ गिनाने से|
आपको मतलब होना चाहिए,
कमाऊ पद पर नियुक्ति से|
न कि,
किसकी अभ्युक्ति से,
कौन सी युक्ति से?
516-जंग लगा बेलन
आज-कल के पति क्यों,
काबू में नहीं रहते?
विषय पर चर्चा हुई,
महिला सम्मेलन में|
निष्कर्ष निकाला गया,
जंग लग गया है,
महिलाओं के बेलन में|
517-कांटे की टक्कर
दोनों लहूलुहान हो,
गिर पड़े खा कर चक्कर|
कारण विफल हो गई,
दोनों के बीच,
कांटे की टक्कर|
518-डाका
हालांकि इस बार पुलिस ने,
इंतजाम किया था बांका|
यहाँ तक कि घेर रखा था,
शहर का हर नाका|
फिर भी सफल हो गया,
निकाल भागने में,
डाकू काका डाल कर डाका|

Tuesday, 25 September 2012

साहित्य चर्चा : 420-चकबस्त अपने सिर आई,दूसरों के सिर डालने के,एक ...

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420-चकबस्त अपने सिर आई,दूसरों के सिर डालने के,एक ...
: 420- चकबस्त अपने सिर आई , दूसरों के सिर डालने के , एक दूसरे की टांग खींचने , मीन-मेख निकालने के , आज-कल , आज-कल कह कर , बात ...

साहित्य चर्चा : 504-बयाना चुनावी सभा से जब कुछ लोग,नेताजी के भाषण...

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504-बयाना चुनावी सभा से जब कुछ लोग,नेताजी के भाषण...
: 504-बयाना चुनावी सभा से जब कुछ लोग , नेताजी के भाषण से पहले ही , जाने लगे | तो नेताजी गुमास्तों पर , बलबलाने लगे | एवं श्रोता...

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: 437-बड़ा महत्व है कविता में दोहे का , धातुओं में लोहे का , और नाश्ते में , पोहे का , बड़ा महत्व है | शादी में दूल्हे का , र...

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: 484-ता-ता-थईया दुनियाँ के बाज़ार में खड़ा मैं , और मेरा मन , दग्ध भी है , स्तब्ध भी | कि यहाँ हर चीज बिकाऊ ही नहीं , है आसानी ...

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: 468-मेरा बचपन , मेरा गाँव काश! फिर से लौट आता , मेरा बचपन , मेरा गाँव | बन वही नन्हा सा बालक , झुँझलाता दिखलाता ताव | घर के प...

Monday, 24 September 2012


420-चकबस्त
अपने सिर आई,
दूसरों के सिर डालने के,
एक दूसरे की टांग खींचने,
मीन-मेख निकालने के,
आज-कल, आज-कल कह कर,
बात टालने के,
साँपों को दूध पिलाकर,
आस्तीनों मे नाग पालने के,
और उन्हें जुल्फें समझ कर,
हरदम हाथों से सम्हालने के,
हम अभ्यस्त हो गए हैं|
सरकार के हर काम की,
खिल्ली उड़ाने में,
सरकारी पार्टियों में फोकट की ,
मदिरा चढाने में,
सरकार द्वारा आबंटित
धन पर दाँत गढ़ाने में,
पकड़े जाने पर सबको,
उल्टी पट्टी पढ़ाने में,
वोट पाने के लिए,
क़ौमों को लड़ाने में,
हम व्यस्त हो गए हैं|
जब तब की,
किन्तु, परंतु, ताकि से,
सत्ता बचाए रखने के,
गुणा, जोड़ बाकी से,
हर हफ्ते लाल सावधानी,
जारी होने की झांकी से,
हिंदुस्तान के खिलाफ बढ़ती,
चीन की चालाकी से,
निराशा जगाने वाले,
राष्ट्रीय खेल हाकी से,
हम ध्वस्त हो गए हैं|
नित नए उजागर होते,
घोटालों की मार से,
विपक्ष और सरकार की,
रोज होने वाली तकरार से,
जंतर मंतर से हर चौथे महीने,
अन्ना की हुंकार से,
डालर के मुक़ाबले रुपया
गिरने के आसार से,
आतंकवादियों को भारत को,
सौंपने के पाकिस्तान के इंकार से,
हम पस्त हो गए हैं|
इठला कर किए गए,
माशूका के निहोरों से,
समय समय पर प्राप्त तोहफे,
अपने पराये औरों से,
पुलिस द्वारा ढूंढ निकाले गए,
आतंकवादियों के ठौरों से,
बार बार होने वाले,
नेताओं के दौरों से,
अपने किए गए नए पुराने,
वायदों को निभाने के ज़ोरों से,
हम आश्वस्त हो गए हैं|
असलियत छुपाने के लिए,
ओढ़े गए लवादों से,
चुनाव जीतने के लिए
किए गए लुभावने वायदों से,
भविष्य में होने वाले बताए गए,
संभावित फ़ायदों से,
आय कर में लागू होने वाले,
तरह तरह के कायदों से,
रोज रोज होने वालीं,
मनमोहक कवायदों से,
हम विश्वस्त हो गए|

Friday, 21 September 2012


504-बयाना
चुनावी सभा से जब कुछ लोग,
नेताजी के भाषण से पहले ही,
जाने लगे|
तो नेताजी गुमास्तों पर,
बलबलाने लगे|
एवं श्रोता एकत्रित करने पर,
खर्चे पैसों का रौब दिखाने लगे|
गुमास्ते ने सफाई दी,
सर आप अपना भाषण शुरू कीजिये,
और उन लोगों को जाने दीजिये|
जरूरी है उनका यहाँ से जाना|
क्योंकि उन्होने लिया है,
दूसरी पार्टी वालों से भी बयाना|
दो ट्रक और मँगवाए हैं|
गरीबों की बस्ती में भी,
पैसे भिजवाए हैं|

Sunday, 16 September 2012


437-बड़ा महत्व है
कविता में दोहे का,
धातुओं में लोहे का,
और नाश्ते में,
पोहे का,
बड़ा महत्व है|
शादी में दूल्हे का,
रसोई में चूल्हे का,
और शरीर में,
कूल्हे का,
बड़ा महत्व है|
पूजा में चंडी का,
रेल में झंडी का,
और बाज़ार मे,
मंडी का,
बड़ा महत्व है|
मंदिर में घंटी का,
गले में कंठी का,
और रिश्ते मे,
आंटी का,
बड़ा महत्व है|
दोस्तों में हर्ष का,
मार्केट में पर्स का,
और अस्पताल में,
नर्स का,
बड़ा महत्व है|
जेल में जेलर का,
व्यापार में सेलर का,
और फिल्मों में,
ट्रेलर का,
बड़ा महत्व है|
जानवरों में नसल का,
घी-तेल में असल का,
और खेती में,
फसल का,
बड़ा महत्व है|
सवारी में रिक्शा का,
शाला में शिक्षा का,
और दान मे,
भिक्षा का,
बड़ा महत्व है|
शब्जियों में आलू का,
भोजन में ब्यालू का,
और बिहार में,
लालू का,
बड़ा महत्व है|
रोगों में रतौंध का,
चिपकाने में गोंद का,
और नेताओं में,
तोंद का,
बड़ा महत्व है|
जीवन में होनी का,
गहनों में सोनी का,
और खिलाड़ियों में,
धोनी का,
बड़ा महत्व है|
तिथियों में चौथ का,
इन्सानों में मौत का,
और औरतों में,
सौत का,
बड़ा महत्व है|
संगीत में गाने का,
दंड में हरजाने का,
और गालियों में,
ताने का,
बड़ा महत्व है|
पक्षियों में तोते का,
बच्चों में पोते का,
और शुभ कर्मों में,
नौंते का,
बड़ा महत्व है