Friday, 17 August 2012

साहित्य क्या है?

साहित्य क्या है? विषय जितना सरल दिखता है, वास्तव में क्या उतना ही सरल है?
कुछ कहते हैं, "जो हित  साधे  वही साहित्य है|
एक साहित्य मनीषी हैं, जिनकी केवल मेरी ही दृष्टि में नहीं हजारों लोगों की दृष्टि  में एक एक साहित्य मनीषी की छवि है| वे आदरणीय भी उतने हैं साहित्य जगत में|
उन्होने  एक बहुत ही प्रतिष्ठित पेशे यानि कि प्राचार्य पद को तिलांजलि दे कर साहित्य साधना एवं साहित्य सेवियों के उत्थान का बीड़ा उठाया हुआ है| वे साहित्य के बहुत बड़े हस्ताक्षर हैं| कहने का तात्पर्य, वे ऐसा करके एक उत्तम हित  साधने का पुनीत कार्य कर रहे हैं|
वे एक ही हैं, पर अनेक ऐसे भी हैं जो साहित्य को अपना हितसाधन बनाए हुये हैं| ऐसे में "हित साधे  सो साहित्य"  कुछ ऐसा ही लगता है जैसे "दिल बहलाने को गालिब ये ख्याल अच्छा है|"

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